राष्ट्रीय शोध-पत्र कार्यशाला 2025
यह 4-दिवसीय विशेष कार्यशाला विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अकादमिक शोध (Academic Research) और शोध-पत्र लेखन की वैज्ञानिक पद्धति में कुशल बनाने के लिए आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शोध मानकों के अनुरूप प्रस्तुत करना और विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच विकसित करना था।
प्रमुख जानकारी (Key Highlights)
- आयोजन की अवधि: 22 दिसंबर से 25 दिसंबर, 2025 तक।
- आयोजक संस्थाएँ: यह कार्यशाला दर्शन शास्त्र विभाग (राजस्थान विश्वविद्यालय), सम्यक ज्ञान प्रचार प्रसार ट्रस्ट और श्री टोडरमल दिगंबर जैन सिद्धांत महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।
- सहभागी: इसमें महाविद्यालय के विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
पाठ्यक्रम और विशेषज्ञ (Curriculum & Experts)
कार्यशाला के दौरान विभिन्न सत्रों में शोध के तकनीकी और व्यावहारिक पक्षों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया:
- शोध: क्या, क्यों और कैसे: प्रोफेसर वीर सागर जैन (लाल बहादुर शास्त्री विश्वविद्यालय, दिल्ली) ने शोध की मौलिक अवधारणा, शोधार्थी के गुण और सत्य की खोज के रूप में शोध के महत्व पर व्याख्यान दिया।
- शोध-पत्र का प्रारूप (Research Format): डॉ. संतोष कुमार गुप्ता (राजस्थान विश्वविद्यालय) द्वारा शोध-पत्र के विभिन्न घटकों जैसे शीर्षक चयन, शोध सारांश (Abstract), प्रस्तावना और कार्यप्रणाली (Methodology) का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
- डिजिटल टूल्स और नैतिकता (Digital Tools & Ethics): डॉ. जिनेश सेठ (बर्मिंघम/मुंबई) ने शोध के स्रोतों, 'जोतेरो' (Zotero) जैसे संदर्भ प्रबंधन सॉफ्टवेयर, गूगल स्कॉलर और शोध नैतिकता (Plagiarism/साहित्यिक चोरी से बचाव) पर मार्गदर्शन दिया।
- भाषाई और व्याकरणिक नियम: प्रोफेसर अनिल जैन (पूर्व विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, राजस्थान वि.वि.) ने शोध-पत्र लेखन में मानक हिंदी के प्रयोग, विराम चिह्नों की महत्ता और भाषा की शुद्धता पर सत्र लिया।
- पुस्तकालय विज्ञान: डॉ. सत्येंद्र कुमार और डॉ. विजेंद्र कुमार ने शोध में पुस्तकालयों और ई-संसाधनों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला का लक्ष्य (Workshop Objectives)
- मौलिक लेखन का विकास: विद्यार्थियों को केवल सूचनाओं के संकलन के बजाय स्वयं के मौलिक शोध-पत्र लिखने के लिए तैयार करना।
- करियर मार्गदर्शन: शोधार्थियों को भविष्य में शिक्षण (NET/JRF), शोध फेलोशिप और प्रतिष्ठित पत्रिकाओं (UGC Care List) में प्रकाशन के लिए दिशा-निर्देश देना।
- संदर्भ पद्धति का ज्ञान: शोध में प्रयुक्त होने वाली विभिन्न संदर्भ शैलियों (APA, MLA, Chicago आदि) और पाद-टिप्पणी (Footnotes) के मानक रूपों का अभ्यास कराना।
उपलब्धियां और परिणाम (Achievements & Results)
- व्यावहारिक प्रशिक्षण: विद्यार्थियों ने शोध-पत्र का खाका (Drafting) तैयार करना और संदर्भ सूची (Bibliography) बनाना सीखा।
- प्रमाणिकता: प्रतिभागियों को यह समझ मिली कि कैसे पारंपरिक जैन दर्शन के विषयों को आधुनिक शोध मानकों के साथ जोड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जा सकता है।
- प्रेरणा: समापन सत्र में विद्यार्थियों ने यह स्वीकार किया कि इस प्रशिक्षण से उनके भीतर अकादमिक लेखन के प्रति भय दूर हुआ और शोध के प्रति रुचि जाग्रत हुई।
यह कार्यशाला विद्यार्थियों को एक सामान्य छात्र से एक 'शोधार्थी' के रूप में परिवर्तित करने और उन्हें वैश्विक अकादमिक जगत की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने का एक सफल प्रयास थी।
Price
From
₹1.00
Courses Title
राष्ट्रीय शोध पत्र कार्यशाला 2025
Language
Not specified
Course Level
All Levels
Reviews
0
Quizzes
154
Duration
9h 09m
Students
0
Certifications
Yes
Start Time
28 Jan, 2026
Instructor
Samyak Gyan Prachar Prasar Trust
₹1.00
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